अच्छी शख्सियत किसी व्यक्ति के लिए कितना खास होता है । आज हम इस पोस्ट में जानेंगे।

अच्छी शख्सियत वो महक होती है जो किसी को भी वश में कर ले। अच्छी शख्सियत क्या होती है।

दिमाग को सकारात्मक बनाने के कुछ बेहतरीन टिप्स

1. उत्साही बने (Be Enthusiastic)

बिना उत्साह के कोई बड़ा काम आज तक नही हुआ है। उत्साह और सफलता साथ साथ चलते है, मगर उत्साह पहले नंबर पर है।

उत्साह – आत्मविश्वास, आत्मबल और वफादारी को बढ़ाता है। यह अमूल्य है।

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उत्साह एक से दूसरे में फैलता है। हम किसी व्यक्ति के बात करने, चलने और हाथ मिलाने के ढंग से उसके उत्साह को महसूस कर सकते है।

किसी चीज़ के लिए उत्साहित होना अच्छी बात है। और इसे आदत बनाया जा सकता है।

2.अपने शब्दों को सावधानी से चुने (Choose Your Words Carefully)

जो मन मे आये, वही बोलने से आदमी को बाद में वह सुनना पड़ता है, जो उसे पसंद नहीं होता।

व्यवहार में चतुर बने – व्यवहार में चतुर बनने का यह मतलब है कि हम आने वाले शब्दो का चुनाव समझदारी और होशियारी से करे , और जाने कि हम कितनी दूर तक जा सकते हैं।

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इसका मतलब यह जानना भी है कि क्या कहना है और क्या नहीं कहना है व्यवहार के बिना प्रतिभा हमेशा काम नहीं आ सकती शब्दों से हमारा नजरिया अच्छा लगता है सब हमारी भावनाओं को चोट पहुंचा सकते हैं और हमारे रिश्ते को तोड़ सकते है।

लोगों को इतनी चोट तो कुदरत भी की तबाही से भी नहीं पहुंचती जीतनी की गाली गलोच या कठोर शब्दों से पहुंचती है।

सोच कर बोले ना कि बोलकर सोचे समझदारी और बेवकूफी में यही फर्क है।

जरूरत से ज्यादा बोलने का मतलब यह नहीं होता कि आप बातचीत करने में कुशल है।

बोलिये कम, एक बेवकूफ बिना सोचे समझे बोलता है। एक बुद्धिमान सोच-समझकर बोलता है ।

कड़वाहट भरे शब्द भरपाई न किया जा सकने वाला नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कई बार देखा गया है कि मां बाप द्वारा बच्चों से की जाने वाली बातचीत का ढंग उनके भविष्य को शक्ल देता है

3. हर काम फौरन करने की आदत डालें (Make a Habit of Doing it Now)

हम सभी ज़िन्दगी में कभी न कभी टालमटोल (Procrastinate) करते हैं। टालमटोल की वजह से हमारा नजरिया नकारात्मक बन जाता है ।

किसी काम को करने से अधिक थकान उस काम को ना करने के लिए की जाने वाली टालमटोल की वजह से होता है ।

कोई भी काम पूरा होने पर खुशहाली लाता है और हौसला बुलंद होता है, जबकि आधा-अधूरा का हमारी हिम्मत को वैसे ही खत्म कर देता है जैसे पानी के टैंक में कोई छेद टैंक को खाली कर देता है |

अगर हम सकारात्मक नजरिया बनाना और कायम रखना चाहते तो आज से जीने और उन्हें तुरंत कायम करने की आदत डालें।

4. आलोचना और शिकायत ना करें (Don’t criticise and complain)

जब मैं आलोचना की बात करता हूं तो मेरा मतलब नकारात्मक आलोचना से है। हम आलोचना क्यों न करें?

जब किसी की बुराई की जाती है तो उसका रवैया खुद को बचाने का हो जाता है। एक आलोचक एक ड्राइवर को पागल बना देने वाले बैकसीट (Back Seat) ड्राइवर की तरह होता है ।

क्या इसका मतलब है कि हमें कभी आलोचना नहीं करना चाहिए, या हम सही आलोचना कर सकते है?

सही आलोचना (Positive Criticism) रचनात्मक आलोचना कैसे दी जा सकती है? नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि मदद करने के इरादे से आलोचना कीजिए ।

आलोचना करते समय हल पेश करना भी जरूरी है। व्यवहार की आलोचना करें , ना कि व्यक्ति की, क्योंकि जब हम व्यक्ति की आलोचना करते हैं, तो उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं।

सहायता करने की इच्छा होने पर ही आलोचना करने का हक मिलता है। अगर आलोचना करने में आलोचक को आनंद नहीं मिल रहा है तो उसे आलोचना करने का हक है लेकिन उसे आलोचना करने में मज़ा आने लगे तो आलोचना रोक देनी चाहिए |

आलोचना स्वीकार करना हो सकता है कि हमारी आलोचना कभी सही और कभी गलत ढंग से की जाती हो दुनिया के में महान लोगों की भी आलोचना हुई है सही आलोचना फायदेमंद हो सकती है और इस एक अच्छी सलाह के रूप में कबूल करना चाहिए |

आलोचना असल में छिपी हुई तारीफ है हम लोग जीतने वालों को पसंद नहीं करते लोग जब सफल नहीं होते और उनके पास बातचीत करने के लिए कोई मुद्दा नहीं होता तो वह सफल लोगों को निशाना बनाते हैं आलोचना से हमेशा बचे रहने का केवल एक ही तरीका है कि हमने तो कुछ कहे ना ही अपने पास कुछ रखें लेकिन इस तरह हम आखिर एक नकारा इंसान बन जाएंगे |

5.हंसाने की आदत डालें और खुशमिजाज बने (Devlop A Sense of Humour)

कुछ लोग खुशमिजाजी किस्म के होते हैं।

आप भी आसान में हंसने-हंसाने की आदत डालिए, इसमें आपमें अपनी कमियों पर भी हंसने की ताकत आ जाएगी।

हंसने-हंसाने की आदत इंसान को हर-दिल-अजीज और आकर्षक बना देती है |

अपने पर हंसना सीखें क्योंकि यह सबसे ज्यादा महफूज मजाक है।

खुद पर हंसने से हमको गिर कर उठने की शक्ति मिलती है। सारी दुनिया में हंसी हर दर्द की कुदरती दवा है।

हंसी मर्ज को मिटा ना सके लेकिन उस के दर्द को बेशक कम कर देती है।

हँसने-हँसाने में किसी भी व्यक्ति को अच्छा और स्वस्थ करने की सकती होती है।

तो आप भी हँसे और लोगों को भी हँसाए।

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