जैसा की आप सब जानते है आज हम बात करने वालें है बंगाली भाषा के एक बहुत बड़े भारतीय लेखक और कवि अक्षय कुमार बरल की |

अक्षय कुमार बरल बंगाली भाषा के एक बहुत बड़े भारतीय लेखक और कवि थे |

अक्षय कुमार बरल की सम्पूर्ण जीवनी

इनका जन्म 1808 में चोरबागण, कोलकाता में हुआ था जो British Raj में Bengal Presidancy हुआ करता था |

चलिए जानते है अक्षय कुमार बरल के बारें में सम्पूर्ण जानकारी |

सम्पूर्ण जानकारी
नाम अक्षय कुमार बरल (Akshay Kumar Boral)
जन्म 1808
मृत्यु 1919
जन्म स्थान कोलकाता के चोरवा गण में
कार्य (work) बंगाली भाषा के कवि
मुख्य कृतियाँ प्रोदिप, कनकनीओलि और चंडीदास
किताबे
  • प्रोदिप
  • कनकनीओलि
  • चंडीदास
  • शंख
  • एषा
  • वुल

अक्षय कुमार बरल का जीवन परिचय | Akshay Kumar Boral Biography

अक्षय कुमार बरल भारतीय कवि होने के साथ एक महान बंगाली लेखक भी थे |

इनका जन्म कोलकाता के चोरवागण में वर्ष 1808 में हुआ था |

अक्षय कुमार बरल जी ने कुछ समय तक दिल्ली एंड लन्दन बैंक में अकाउंट क्लर्क के रूप में भी काम किया था |

साथ ही ब्रिटिश लाइफ insurance company में भी अक्षय कुमार बरल जी ने सचिव के पद पर कार्य किया था |

अक्षय कुमार बरल कभी कभी कोलकाता के ही हरे विद्यालय में पढने जाया करते थे |

वे कवि बिहारी लाल चक्रवर्ती और रवीना टैगोर के साहित्य को बचपन से ही पढने में रूचि रखने लगे थे |

अक्षय जी का बचपन से ही साहित्य की और लगाव थोडा ज्यादा था |

उनके साहित्यिक कार्यो को बंगाल में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के बंगाली साहित्य के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया था |

अक्षय कुमार बरल जी के द्वारा रचित किताबे | Akshay Kumar Boral Books

  • प्रोदिप ( Prodip )
  • कनकनीओली ( Kanakanjoli )
  • शंख ( Shankha )
  • एषा ( Esha )
  • वुल ( Vul )
  • चंडीदास ( Chandidas )

अक्षय कुमार बरल जी की मृत्यु | Akshay Kumar Boral Death

अक्षय कुमार बरल जी की मृत्यु 60 की उम्र में हुई थी |

19 जून 1919 को अक्षय कुमार बरल जी की मृत्यु हुई थी |

अक्षय कुमार बरल के बारे में रोचक बाते | Interesting Facts About Akshay kumar Boral

  • अक्षय कुमार बरल का जन्म वर्ष 1808 में कोलकाता के चोरवा गण में हुआ था तथा मृत्यु वर्ष 1919 को हुयी
  • वे एक महान लेखक होने साथ साथ बंगाली भाषा के महान कवि भी थे .
  • अक्षय कुमार बरल जी बचपन से ही साहित्य पढने के शौकीन और लिखने के भी शौकीन थे और ये चीज उन्हें बाद में बहुत काम आई .
  • उनके साहित्यिक कार्यो में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के बंगाली साहित्य के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था
  • उनकी प्रमुख किताबो में से प्रोदिप , कनकनीओलि , शंख , एषा , वुल , चंडीदास भी शामिल है .
  • इनकी प्रारम्भिक शिक्षा हरे गाँव में सम्पन्न हुयी .
  • इन्होने ब्रिटिश लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी में सचिव के पद पर भी काम किया
  • वे कवियों बिहारी लाल चक्रवर्ती और रवीना टैगोर के साहित्य बचपन से ही पढने में रूचि रखते थे .